ज़िन्दगी-ज़िन्दगी में फर्क होता है, मौत-मौत में फर्क होता है, इंसान-इंसान में फर्क होता है। एक सीईओ के मारे जाने पर "स्वतंत्रता", "समानता" और "भ्रातृत्व" जैसे शब्दों की असलियत सामने आ रही है। जिस तरह एक सीईओ के अनंत को ढूँढने के लिए शाशन-प्रशाशन दौड़ने लगता है और बराबर में निठारी में कई बच्चों के गायब होने की परवाह नहीं होती और नॉएडा में ही गार्ड द्वारा मजदूर को पीट-पीटकर मारने पर पत्ता नही हिलता लेकिन आज देश-विदेश के धनपति, मंत्री-सरकार और "पूँछ हिलाऊ"(सारा नहीं) मीडिया सब परेशान हैं। बहुत कुछ कहा जा सकता है लेकिन पंजाब के क्रांतिकारी कवि पाश की यह कविता ज्यादा बयान करेगी...
संविधान
यह पुस्तक मर चुकी है
इसे न पढें
इसके शब्दों में मौत की ठंडक है
और एक-एक पृष्ट
ज़िन्दगी के आखिरी पल जैसा भयानक
यह पुस्तक जब बनी थी
तो मैं एक पशु था
सोया हुआ पशु...
और जब मैं जगा
तो मेरे इंसान बनने तक
यह पुस्तक मर चुकी थी
अब यदि इस पुस्तक को पढोगे
तो पशु बन जायोगे
सोये हुए पशु।
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Thursday, September 25, 2008
Wednesday, September 24, 2008
घोर अन्याय हैं सीईओ को मारना!
भगतसिंह ने अपनी नोटबुक में मार्क ट्वेन का यह उद्धरण नोट किया है — "लोगों के सर कलम कर दिए जाने को तो हम भयंकर मानते हैं, पर हमें जीवन-पर्यंत बरकरार रहने वाली मृत्यु की उस भयंकरता को देखना नहीं सिखाया गया है जो गरीबी और अत्याचार द्वारा व्यापक आबादी पर थोप दी गयी हैं।" इटालियन कंपनी के सीईओ की ह्त्या को दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक बताया जा रहा है। बेशक मजदूरों की एकदम गलती हैं। उन्हें न्याय-फ्याय की लड़ाई लड़नी ही नहीं चाहिए थी। नॉएडा, ग्रेटर नॉएडा से रोजाना मजदूर निकाले जाते हैं। पर वो तो चुपचाप खून के आंसू पीकर बैठ जाते हैं। उस कंपनी के मजदूरों को क्या ज़रूरत थी हक की इतनी लम्बी लडाई लड़ने की। क्या समझते हैं की श्रम विभाग, अदालत, पुलिस, राजनीतिक पार्टियाँ, ट्रेड यूनियन उनके लिए हैं। बड़ी ग़लतफहमी में थे बेचारे। किस्मत के मारे इन अच्छे-अच्छे शब्दों के फेर में पड़ गए। और जब इनका असली रूप सामने आया तो बिफर उठे। अगर चुप्पा मार लेते तो क्या बिगड़ जाता? ज्यादा से ज्यादा दो-चार मजदूर पैसे की तंगी से आत्महत्या कर लेते, या १००-५० घरों में कुछ दिन फाका करना पड़ता या नौकरी छोटने का दंश सारी जिंदगी उन्हें और उनके परिवारों को झेलना पड़ता या नए सिरे से मजदूरी तलाशनी पड़ती और पहले से कम पैसो में काम करना पड़ता। अब देखिये यह तो झेलना ही पड़ेगा वरना देश आगे कैसे बढेगा। वैसे अब पुलिस सजग हो गयी हैं। अबकी ऐसा हुआ तो देश की तरक्की के लिए सख्त से सख्त कदम उठाया जाएगा। आप लोगों ने बहुत बड़ी गलती की। लेकिन आपको मिली सज़ा दूसरे मज्दूरों के लिए एक सबक हो यह सुनिश्चित किया जायेगा।
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