Friday, February 13, 2009

आप प्रमोद मुत्‍तालिक को जरूर जानते होंगे, क्‍या आप पवन शेट्टी को जानते हैं?

वैलेंटाइन डे पर श्रीराम सेना और प्रमोद मुत्‍तालिक सुर्खियों में छाये हुए हैं। लेकिन क्‍या आप मैंगलोर हमले में हमलावरों का मुकाबला करने वाले पवन शेट्टी को जानते हैं? शायद न जानते हों। लेकिन आपने टीवी पर बार-बार दिखाई जा रही फुटेज में हमलावरों से लड़ते एक नौजवान को जरूर देखा होगा। जी हां, यही पवन शेट्टी है। दरअसल वह उस दिन संयोग से ही पब के बाहर मौजूद था और महिलाओं को बुरी तरह पीटते व‍हशियों की दरिंदगी उसे बर्दाश्‍त नहीं हुई और वह अकेला ही उन सबसे भिड़ गया।
उसके द्वारा बचाई गई एक महिला ने उसके बारे में कहा, ''वह हीरो है। वहां जानवरों के बीच मौजूद चंद इंसानों में से एक वह था।'' इस घटना के बाद स्‍थानीय मीडिया में थोड़ी तारीफ होने के बावजूद राष्‍ट्रीय मीडिया ने उससे ज्‍यादा प्रमोद मुत्‍तालिक के चेलों को दिखाया। शायद उन्‍हें उसमें कोई ''न्‍यूज वैल्‍यू'' न दिखायी दी हो।
विनम्र पवन शेट्टी ने कहा, ''वह कोई हीरो नहीं है।'' उस दिन पब में महिलाओं को पिटते देखकर उससे रहा नहीं गया है और वह अकेला ही उनसे भिड़ गया। हालांकि वहां कई लोग मौजूद थे लेकिन किसी की हिम्‍मत श्रीराम सेना के कार्यकर्ताओं से उलझने की नहीं थी। उसके एकबारगी प्रतिरोध करने पर पहले तो श्रीराम सेना के कार्यकर्ता हक्‍के-बक्‍के रह गये फिर सब मिलकर उसपर टूट पड़े। फिर भी उसने कई महिलाओं को वहां से निकलने में मदद की।
पवन शेट्टी नाम का यह नौजवान पहले बजरंग दल का सदस्‍य था। उसका कहना है कि चूंकि वह लोगों से बेवजह नफरत नहीं कर सकता इसलिए उसने बजरंग दल छोड़ दिया था। उसने एक बड़े मार्के की बात कही कि उसे इन लोगों और तालिबानियों में कोई फर्क नजर नहीं आता।
पवन शेट्टी हमें रूक कर बहुत कुछ सोचने पर मजबूर करता है। पवन शेट्टी होने के क्‍या मायने हैं? क्‍या पवन शेट्टी सिर्फ एक अपवाद है? पवन शेट्टी जैसे लोग क्‍यों बड़े पैमाने पर लोगों या समाज के सामने एक उदाहरण के तौर पर नहीं आ पाते?
मुझे नहीं लगता कि पवन शेट्टी कोई अपवाद है। ऐसे संगठनों में बहुत सारे नौजवान आदर्शों और विचारों के साथ जाते हैं लेकिन जल्‍द ही उन्‍हें अंदर की असलियत और अच्‍छी-अच्‍छी बातों के पीछे की सच्‍चाई मालूम हो जाती है। फिर वे उनकी राजनीति और विचारधारा से अपने इन अनुभवों के और तर्कों के आधार पर भी उनसे छिटकने बल्कि उन्‍हें नापसंद करने लगते हैं। हो सकता है अपने लड़कपन के हमारे-आपके भी ऐसे बहुतेरे अनुभव हों। इसलिए अगर पवन शेट्टी बजरंग दल छोड़कर आया और उसने पब में महिलाओं को बचाया तो इसमें एक सामान्‍य वजह है। वह यह कि कोई भी स्‍वस्‍थ दिल-दिमाग का आदमी न तो ऐसे संगठन में ज्‍यादा दिन तक रह सकता है और अगर बेहद डरपोक न हुआ तो न वह ऐसे मौकों पर गुण्‍डों से निपटने से पीछे हटेगा।
आज मीडिया में प्रमोद मुत्‍तालिक छाया हुआ है तो किसको फायदा पहुंच रहा है? असल में मीडिया हाईप से ऐसे तत्‍वों और उनकी राजनीति को फायदा ही होता है। आप चाहे अखबार में या टीवी पर लाख कोस लें लेकिन समाज के एक त़बके में उनका आधार और ज्‍यादा मजबूत ही होता है। इस तरह मीडिया उन्‍हें हीरो बना देता है। लेकिन पवन शेट्टी जैसे लोगों को भुला दिया जाता है। क्‍योंकि उसने गुण्‍डों से मुकाबला किया यह उतनी न्‍यूज वैल्‍यू नहीं रखती जितना कि प्रमोद मुत्‍तालिक के किसी चेले का यह बयान कि वे मैंगलोर को जाम कर देंगे या कि वैलेंटाईन डे पर जबर्दस्‍ती शादी करवाई जाएगी। यह हमारे मीडिया की दौड़ है जो सनसनी के पीछे भागता है, उस खबर के पीछे भागता है जिससे लोगों में उत्‍तेजना फैले। बकौल कहें तो पवन शैट्टी ने काम तो ठीक किया पर गुरू इस खबर में वो क्‍या है कि ''न्‍यूज वैल्‍यू'' नहीं है।
इसलिए पवन शेट्टी को कोई नहीं जानता और प्रमोद मुत्‍तालिक को सब जानते हैं। प्रमोद मुत्‍तालिक के सुकर्मों से प्रेरणा लेकर बंबई, दिल्‍ली और कई जगहों के धर्मरक्षक सक्रिय हो जाते हैं। जो वैलेंटाईन डे जैसे मौकों पर फिर किसी सनसनी का मसाला दे देते हैं। चूंकि इस समाज और उसके मीडिया को न पवन की जरूरत है न गुण्‍डों से लड़ने के पीछे उसकी सोच जानने की, सो वह गुमनामी के अंधेरे में खो जाता है। वह इसलिए भी खो जाता है क्‍योंकि वह शायद छोटी-मोटी सी नौकरी करने वाला गरीब नौजवान है। दूसरी तरफ हिन्‍दुत्‍व के खिलाफ आग उगलने वाले हमारे मिडिल क्‍लास का एक प्रगतिशील तबका है जो कट्टरपंथियों से लड़ने के लिए पांच रूपये की मोमबत्‍ती जलाता है, जुलूस निकालता है, फोटो खिंचवाता है और फिर चैन से सो जाता है कि अब फासीवाद कैसे आ सकता है। (बेहद बेहूदे अभियान भी आजकल अखबारों में चर्चा में हैं)
पवन शेट्टी असल में हमें यह बताता है कि ऐसे तत्‍वों से निपटने के लिए हमें करना क्‍या होगा? आनुष्‍ठानिक नहीं लड़ाई तो लड़ाई के तरीके से ही लड़ी जाती है। पवन शेट्टी बताता है कि इन लोगों को सड़कों पर, आमने-सामने और इन्‍हीं के अंदाज में जवाब देना होगा। मुझे लगता है ऐसा पवन जैसे वे तमाम लोग मिलकर करेंगे—जिनका ध्‍यान ये लोग जिंदगी के असली मुद्दों से भटका कर—उनकी जिंदगी की बदहाली को पीढ़ी-दर-पीढ़ी बरकरार रखने की साजिश के तहत भटकाते आ रहे हैं। क्‍या पवन शेट्टी जैसे लोगों को समाज के सामने लाना इस लड़ाई को मजबूत नहीं करेगा। क्‍या आपको ऐसा लगता है...

15 comments:

अफ़लातून said...

पवन शेट्टी होने पर अच्छी चर्चा के लिए हार्दिक बधाई। मैंने मंगलूर की घटना की शिकार एक स्त्री के मुँह से उनकी प्रशंसा सुनी थी ।

Abhishek said...

ज़बरदस्त लेख! आपने बिल्कुल सही कहा, मीडिया को तो सिर्फ़ सनसनी चाहिए ख़बर बेचने के लिए। मुतालिक जैसे लोगों का बखान करके उनके विचारों को हज़ार और लोगों तक पंहुचा दिया जाता है। और पवन शेट्टी जैसे लोग सिर्फ़ ब्लॉग में दर्ज हो कर रह जाते हैं!

आपके इस पोस्ट का लिंक मैंने अपने ब्लॉग पर भी डाला है। उम्मीद है आप बुरा नहीं मानेंगे।

Kishore Choudhary said...

बहुत सही बात कही आपने यह हमरी विडम्बना ही है कि मिडिया भी ऐसी ख़बरों के रेहन रखा है और हम चुप

डॉ .अनुराग said...

शुक्रिया दोस्त...मुतालिक के चक्कर में हम वाकई असली हीरो को भूल गये थे .

आनंद said...

बहुत अच्‍छी बात कही है। पवन शेट्टी सचमुच का हीरो है।
- आनंद

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

पवन शेट्टी जैसे लोगों के संगठन बन जाएँ तो दोनों की ही छुट्टी समझें। यह आजमाया हुआ नुस्खा है। बल्कि ऐसे संगठन होने ही चाहिए हर शहर में, हर कस्बे में।

आप को बधाई जो शेट्टी के बारे में लिखा।

Mired Mirage said...

पवन शेट्टी के बारे में लिखने के लिए धन्यवाद।
घुघूती बासूती

रौशन said...

पवन शेट्टी की बात सामने लाने का शुक्रिया
हम सब के शब्द उन तक पहुँच सके तो कितना अच्छा होता यकीनन राष्ट्रीय मीडिया की यह कमी है कि वह सही बातें सामने नही ला पाता . अगर मुत्तालिक के हिस्से के कुछ मिनट पवन शेट्टी पर खर्च हो जाते तो क्या बुरा होता ?

योगेन्द्र मौदगिल said...

पवन शेट्टी से मिलवाने का आभार.... देश की जरूरत हैं ऐसे लोग.. बधाई..

Suresh Chiplunkar said...

कपिल जी धन्यवाद… मुझे वैचारिक रूप से खोखला बताने के लिये… अब उम्मीद करता हूँ कि इस खोखलेपन को भरने के लिये कोई दमदार वैचारिक पोस्ट आप लिखेंगे ताकि मैं थोड़ा सा लाभान्वित हो सकूं…

sanchit said...

your blog looks good.. I would suggest you to chose some wider template so the text can be written in few lines..as of now there are only 4-5 words in each line which make a article long an less friendly to read!! :)

Amit said...

bilkul sahi....unhe jawaab unhi ke andaaz main milna chaaiye...accha laga aapne pawan par likha..maine bhi news main is bande ko dekha tha..aur tab yahi laga tha ki kaash ek do bande agar iske saath hote to ye kamine sri raam sena waale kabhi dubaara aisi harkat nahi karte...

naveen prakash said...

कपिल भाई आपने पवन शेट्टी पर यह शानदार लेख लिखकर ऐसे तालिबानी संगठनों में शामिल होने की तैयारी कर रहे हमारे देश के गुमराह नौजवानों को सोचने पर जरूर विवश कर दिया होगा?

वास्तव में आज इन कट्टरपंथी हिन्दू आतंकवादी संगठनों के खिलाफ ऐसे लड़ाकू संगठनों को खड़ा करने की जरूरत है जो इनका मुकाबला सड़कों पर कर सकें यानी संस्कृति के नाम पर हमारी माँ-बहनों की इज्ज़त के साथ खिलवाड़ करने वाले इन लोगों को सड़कों पर दौड़ा-दौड़ा कर पीटने में पीछे न हटे।

swapandarshi said...

पवन शेट्टी के बारे में लिखने के लिए धन्यवाद।

Anonymous said...
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