Saturday, January 10, 2009
गाज़ा में मरने वालों की संख्या 800 हुई
Wednesday, December 31, 2008
हमास को हटाना कौन सा लोकतंत्र है?
(पुनश्च: ताजा खबर है कि इजरायल ने गाजापट्टी की घेरेबंदी में समुद्र के रास्ते दवाईयां लाने वाले जहाज 'डिगनिटी' पर हमला करके उसे वापस जाने पर मजबूर कर दिया है। फिलीस्तीन के अस्पतालों में दवाइयों की भारी किल्लत है। और ओबामा जिन्हें काफी बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया था, ने इस मामले में चुप्पी साध ली है। हमारे देश में माकपा नाम की पार्टी ने इन हमलों का विरोध किया जिसके खुद के हाथ सत्तर के दशक में हजारों निर्दोष छात्रों-किसानों और हाल में नंदीग्राम और लालगंज के लोगों के खून से सने हैं।)
Sunday, December 28, 2008
क्या इजरायली सरकार आतंकवादी नहीं है?
गाजा में बेकसूरों का खून बहाने वाली इजरायली सरकार क्या आतंकवादी नहीं है? हम आतंकवाद को एक ही चश्मे से क्यों देखते हैं? क्या इसलिए कि हमें ऐसे ही देखना सिखाया जाता है। हालांकि बहुत सारे लोग इस बात से सहमत नहीं होंगे लेकिन हम आतंकवाद को दरअसल उस नजरिए से देखते हैं जो देश और दुनिया भर की सरकारें हमें दिखाती हैं। जबकि हकीकत यह है कि राज्य या सरकारी आतंकवाद ज्यादा घातक और अमानवीय होता है। आंकड़े भी बताते हैं कि राज्य आतंकवाद से मरने वाले निर्दोष लोग संख्या में कहीं ज्यादा होते हैं। लेकिन इसके खिलाफ कोई असंतोष नहीं दिखाई देता है। वजह वही नजरिया है जो सरकारों ने हमें दिया है। इस घटना को ही लें। क्या आपको लगता है कि इसकी दुनिया के पैमाने पर इतनी भर्त्सना होगी जितनी मुम्बई हमलों या किसी और हमले की हुई थी। यकीनन नहीं। क्योंकि यह बात ही जेहन से गायब कर दी गई है कि राज्य या सरकार भी आतंकवादी कार्रवाई कर सकती है। आतंकवाद की परिभाषा को सरकारें बड़ी चालाकी से अपने आतंकवाद को छुपाने और कमजोरों के प्रतिरोध पर नकारात्मक लेबल चस्पां करने के लिए इस्तेमाल करती हैं। असल में आतंकवाद आतंकवाद होता है। बल्कि कई बार कमजोरों की बदले की कार्रवाई राज्य या सरकारों के दमन के जवाब में ही होती हैं। गाजा का नरंसहार एक आतंकवादी घटना है। और इसके लिए इजरायली सरकार को भी आतंकवादी माना जाना चाहिए। सवाल यह है कि आतंकवाद की परिभाषा को हम सरकारों से उधार लेकर मानते रहेंगे या खुद आतंकवाद (अन्य और राज्य के आतंकवाद को भी) को ठीक से समझना शुरू करेंगे।