Monday, June 8, 2009

एक जन रंगकर्मी विदा हो गया

हिन्‍दी रंगमंच के एक महत्‍वपूर्ण अंक का पटाक्षेप हो गया। हबीब साहब का जाना न सिर्फ रंगमंच की क्षति है बल्कि धार्मिक रूढ़ि‍यों, अंधविश्‍वासों और साम्‍प्रदायिकता के खिलाफ लड़ने वाले हर कलाकार, बुद्धिजीवी और आम लोगों की क्षति है। हबीब तनवीर साहब को विनम्र श्रद्धांजलि......









5 comments:

woyaadein said...

हबीब तनवीर साहब को कोटि-कोटि नमन एवं श्रद्धांजलि के श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूँ.....भगवान उनकी आत्मा को शान्ति दे.....

साभार
हमसफ़र यादों का.......

नीरज गोस्वामी said...

नाटक को समर्पित ऐसा दीवाना न कभी देखा ना सुना...मध्य प्रदेश के आदिवासिओं द्वारा प्रस्तुत नाटक "चरण दास चोर" जिसने भी देखा है वो अनघड कलाकारों के अद्भुत अभिनय और बेजोड़ निर्देशन को देख दांतों तले उंगलियाँ दबा लेता है...हबीब साहेब ने "आगरा बाज़ार " और "चरण दास चोर" जैसे नाटकों से धूम मचा दी थी... उनके जयपुर प्रवास के दौरान मैं जो कुछ उनसे सीखा वो ज़िन्दगी की अनमोल धरोहर है...ऐसे कर्मठ रचना धर्मी को मेरी भावः भीनी श्रधांजलि...
नीरज

संदीप said...

वाकई में एक जन रंगकर्मी विदा हुआ है....

Udan Tashtari said...

श्रृद्धांजलि!!

राजकुमार ग्वालानी said...

हबीब जी को हम भी अपने श्रृद्धा सुमन समर्पित करते हैं। हम भी उनके शहर के हैं और कुछ मौकों पर उनसे रूबरू होने का मौका मिला है। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे यही कामना करते हैं।
नहीं रहे वे वीर- जिनको कहते थे सब हबीब तनवीर