Thursday, October 8, 2009

फ्रांसिस इंदवार की हत्‍या और नक्‍सलवाद

फ्रांसिस इंदवार की हत्‍या ने ऐसे समय में नक्‍सलवाद की सोच को सवालों के केंद्र में ला दिया है जब सरकार इनसे निपटने की तैयारियों को अमलीजामा पहना रही है। एक साधारण कर्मचारी की हत्‍या को किसी भी लिहाज से कतई जायज नहीं ठहराया जा सकता। एकदम साफ शब्‍दों में इसे नृशंस हत्‍या कहना ज्‍यादा ठीक होगा।
नक्‍सली राजनीति सामाजिक परिवर्तन के दीर्धगामी और श्रमसाध्‍य रास्‍ते को छोड़कर अपने उद्भव से ही शोटकर्ट के रास्‍ते को पकड़ चुकी थी। बल्कि कहना चाहिए कि सही रास्‍ते उसे कभी ठीक नहीं लगे। इस प्रकार की हत्‍याओं से सबसे ज्‍यादा नुकसान जहां जनआंदोलनों को होगा वहीं इनसे जुड़े मानवाधिकार और नागरिक अधिकार के लिए लड़ने वाले लोगों को हो सकता है। ऐसे समय में सामाजिक परिवर्तन की लड़ाई को महज आतंकवादी कार्रवाई में तब्‍दील कर देने वाली नक्‍सली राजनीति से अलग करके सामने लाने की जरूरत आज पहले से कहीं ज्‍यादा है।

2 comments:

madhubaganiar said...

This type of unmindful violence will certainly harm the process of changing the society. The people who wish to perpetuate the social conditions for their own convenient will take this to supress the voice of any change in society.

Dr. Amar Jyoti said...

इंदवार की हत्या हर लिहाज़ से एक ग़लती थी। क्राँतिविरोधी प्रतिक्रियावादी शक्तियां इसका लाभ उठायेंगी। प्रयास होना चाहिये कि ऐसी भूल दुहराई न जाये।